Saturday, December 3, 2022

‘The Death of Stalin’ Hindi Review: ऐतिहासिक काला हास्य।

ऐतिहासिक विषयों पर फ़िल्म बनाना, नाटक, कहानी और उपन्यास लिखना काजल की कोठरी में प्रवेश करने के समान है। आप कितना भी बचाने की चेष्टा करें आपको कहीं न कहीं थोड़ी – बहुत कालिख तो लगेगी ही लगेगी। फिर मंशा की भी बात होती है कि आप निष्पक्ष भाव से फ़िल्म बना रहे हैं, भक्ति भाव से बना रहे हैं, क्रूरतम आलोचना करने के लिए फिल्म बना रहे हैं या उसके पीछे कोई और ही मंशा काम कर रही है! अब “The Death of Stalin” के पीछे क्या मंशा है वो तो बनानेवाला बता सकता है या फिर इतिहासकार। हम और आप तो उसकी ही बात कर सकते है जो हमने देखा।

मास्को 1953, रूस की साम्यवादी क्रांति को तीस साल हो चुके हैं। परदे पर एक स्त्री खचाखच भरे एक सभागार में बड़ी ही सुमधुर पियानो बजा रही है, शायद मोजार्ट की कोई धुन। सब एकाग्रचित होकर इस संगीत को सुन रहे हैं तभी इस आवाज़ के बीच कैमरा रेडियो प्रसारण के एक सुई पर अटकती है और वहां यह लिखा हुआ उबारता है – “विगत बीस साल से स्टालिन द्वारा स्थापित एनकेवीडी सुरक्षा दल ने ख़ूब आतंक मचाया, जो स्टालिन के दुश्मनों की सूची में थे वो गिरफ्तार हुए, निर्वासित किए गए या उनकी हत्या कर दी गई।” और इतने मात्र से फ़िल्म का माहौल बना दिया जाता है। वो कहते हैं ना कि पहला सुर सबसे आवश्यक होता है और उसी के आधार पर गीत गाए जाएंगे। तो “The Death of Stalin” का पहला सुर उसकी टोन को अच्छे से स्थापित कर देता है। संगीत की महफ़िल चल रही है कि तभी फोन बजाता है और पता चलता है कि सात मिनट बाद एक फोन आने वाला है और वो फोन स्टालिन का होगा।

इधर स्टालिन अपने उन विरोधियों की लिस्ट जारी करने में व्यस्त है जिन्हें पकड़ा जाना है, देश निकाल दिया जाना है और जिनकी हत्या की जानी है। लिस्ट तैयार होते ही सेना के अलग अलग अफसरों को सौंप दिया जाता है और वो अपने अपने दल के साथ काम में जुट जाते हैं। रात का वक्त है, इधर संगीत की महफ़िल समाप्ति की ओर अग्रसर है और फोन बजाता है और स्टालिन की आवाज़ आती है वो रेडियो पर रोज प्रसारण सुनते हैं और अब उन्हें आज के संगीत की महफ़िल की रिकार्डिंग सुननी है। संगीत की महफ़िल समाप्त हो जाता है। फोन सुननेवाला भागकर सारे संगीतकारों और दर्शकों को रोकता है और उन्हें बताता है कि कॉमरेड स्टालिन रिकार्डिंग सुनना चाहते हैं लेकिन अफ़सोस की आज की महफ़िल की रिकार्डिंग नहीं हुई है इसलिए सबको यहीं रुककर सबकुछ पुनः दुहराना होगा। दर्शक में से कुछ लोग चले जाते हैं तो वो अपने एक सलाहकार को फुटपाथ से मोटे लोगों को पकड़कर दर्शक दीर्घा में बैठाने को कहता है ताकि जब आखिर में तालियों की आवाज़ आई तो स्टालिन को श्रोताओं की संख्या कम न लगे। सहयोगी फुटपाथ की तरफ भागता है और इधर जिनके – जिनके नाम लिस्ट में हैं उन्हें शहर भर में ढूंढकर पकड़ा जा रहा है और उधर स्टालिन अपने सहयोगियों के साथ हंसी – मज़ाक करने और रात्रि भोजन करने में व्यस्त है।

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पियानो बजानेवाले लड़की पियानो बजाने से इंकार कर देती है तो फोन सुननेवाला व्यक्ति उसे अकेले में ले जाता है और बताता है कि स्टालिन को इंकार करने का क्या मतलब है। लड़की बताती है कि उसे अच्छे से मालूम है क्योंकि वो अपने भाई और बाप की हत्या देख चुकी है। व्यक्ति उसे पैसों का लालच देता और लड़की दुगने पैसे लेकर बजाने को तैयार हो जाती है। उधर शहर में एक बुजुर्ग के यहां दरवाज़े पर जोर से दस्तक होती है, वो उठता है और अपनी पत्नी को चूमते हुए आई लव यू कुछ ऐसे कहता है जैसे उसका आख़िरी वक्त आ गया है। वो दरवाजा खोलता है और सामने वहीं फोन सुननेवाला व्यक्ति है जो दरअसल इस बुजुर्ग को उस संगीतमय आयोजन में ले जाने के लिए आया है क्योंकि पूरे शहर में उसके जैसा संगीत संचालक और कोई नहीं है। इस प्रकार संगीत बजाया जाता है, उसकी रिकार्डिंग होती है और स्टालिन को भेज दिया जाता है। स्टालिन संगीत बजाता और सुनता है कि तभी वो बेहोश होकर फ्लोर पर गिर पड़ता है। बाहर पहरे पर तैनात सुरक्षादल स्टालिन के गिराने की आवाज़ तो सुनते हैं लेकिन कोई भय से दरवाज़ा नहीं खोलता कि कहीं संगीत में खलल न पड़ जाए। सुबह जब मिस्ट्रेस स्टालिन की चाय लेकर पहुंचती और पहरे पर तैनात सुरक्षाकर्मी दरवाज़ा खोलते हैं और स्टालिन को फर्श पर गिरा देख शोर मचाती है तत्पश्चात अन्य लोग जमा होते हैं। नकली रोना धोना शुरू होता है। स्टालिन के कुछ सहयोगी उसे उठाकर बिस्तर पर ले जाते हैं और बातचीत होती है कि किसी अच्छे डॉक्टर को बुलवा लिया जाए लेकिन तभी उन्हें यह ध्यान आता है कि सारे अच्छे डॉक्टरों को तो उन्होंने मारवा दिया है। बहरहाल, कुछ बचे खुचे डॉक्टरों को उठा लिया जाता है और स्टालिन को ठीक करने के कार्य पर लगाया जाता है। डॉ बताए हैं कि स्टालिन दाएं अंग के पैरालाइसिस के शिकार हुए हैं और ठीक होने के मौक़े ना के बराबर है। दूसरे दिन स्टालिन को होश आता है और सभी उनकी तरफ भागते हैं। स्टालिन की आवाज़ नहीं निकल रही है और वो एक पेंटिंग की तरफ इशारा कर रहा है। पेंटिंग में एक स्त्री एक मेमने को दूध पिला रही है। सब अपनेजेडअपने तरह से एक से एक हास्यास्पद अर्थ निकालने लगते हैं तभी स्टालिन बिस्तर पर गिर पड़ते हैं और उनकी मौत हो जाती है। उसके बाद जो शुरू होता है वो प्रहसन है। एक से एक विचित्र किन्तु सत्य (कम से कम निर्देशक का तो यही मानना है) घटनाएं शुरू होती हैं।

“The Death of Stalin” का पूरा स्वर प्रहसन्नुमा है जिसे निर्देशक Armando Iannucci बड़ी ही कुशलता से संचालित करते हैं। Armando Iannucci, David Schneider और Ian Martin ने जो पटकथा लिखी है उसका आधार Fabien Nury और Thierry Robin की किताब La Mort de Staline है। अभिनेताओं में Steve Buscemi, Simon Russell Beale, Paddy Considine, Rupert Friend, Jason Isaacs, Olga Kurylenko, Michael Palin, Andrea Riseborough, Paul Chahidi, Dermot Crowley, Adrian McLoughlin, Paul Whitehouse और Jeffrey Tambor के नाम प्रमुख हैं और सबने अपना काम बेहतर ढंग से अभिनीत किया है।

कई बार अमूमन ऐसा होता है कि एक बुरी व्यवस्था के खिलाफ़ लड़ते – लड़ते जाने – अंजाने हम ख़ुद ही बुरे हो जाते हैं। आज रूस जिस मुकाम पर खड़ा है उसकी जड़े “The Death of Stalin” में देखी जा सकती हैं। सोवियत की क्रांति और उसका पतन इतिहास की महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक हैं और यह फ़िल्म हंसते – हंसते उसकी बानगी आपके समक्ष प्रस्तुत करती है।


फ़िल्म “The Death of Stalin” Prime Video पर देखी जा सकती है|

पुंज प्रकाश
पुंज प्रकाश
Punj Prakash is active in the field of Theater since 1994, as Actor, Director, Writer, and Acting Trainer. He is the founder member of Patna based theatre group Dastak. He did a specialization in the subject of Acting from NSD, NewDelhi, and worked in the Repertory of NSD as an Actor from 2007 to 2012.

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