Tuesday, December 7, 2021

‘Meenakshi Sundareshwar’ Story & Ending In Hindi

पढ़-लिख लेने के बाद कैरियर बनाना इस कदर जद्दोजहद भरी कवायद बन चुका है कि नौजवान पीढ़ी इसके अलावा कुछ और सोच ही नहीं पा रही है| ऐसे में जीवन के दूसरे पक्षों का उपेक्षित रह जाना स्वाभाविक है| कैरियर और व्यक्तिगत जीवन के बीच सामंजस्य बैठाने में हज़ार मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है| इस खींचतान को निर्देशक विवेक सोनी अपनी पहली फ़िल्म ‘Meenakshi Sundareshwar’ में दिखाने की कोशिश करते हैं| फ़िल्म परंपरागत विवाह, संयुक्त परिवार और लॉन्ग डिस्टेंस रिलेशनशिप की मुश्किलों पर भी बात करती है| 

‘Meenakshi Sundareshwar’ फ़िल्म में नायक-नायिका शादी के बाद एक दूसरे को समझने की कोशिश कर ही रहे होते हैं कि परिस्थिति वश उन्हें अलग शहरों में रहना पड़ता है| भगौलिक दूरी रिश्तों को कैसे प्रभावित करती है, फ़िल्म इसे समझने का प्रयास करती है| 


Plot of ‘Meenakshi Sundareshwar’ 

तमिलनाडु के मदुरै शहर में रहने वाले एक संयुक्त परिवार का छोटा बेटा सुंदरेश्वर (अभिमन्यु दसानी) इंजीनियरिंग करके साल भर से नौकरी की तलाश कर रहा है, लेकिन अभी तक बात बनी नहीं है| उसके पिता चाहते हैं कि वह भाई के साथ मिलकर साड़ी का पारिवारिक कारोबार संभाले, पर सुंदरेश्वर तो अपने दम-ख़म पर जीवन की राह तय करने का सपना देखता है| 

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सुंदरेश्वर परिवार वालों के साथ शादी के लिए लड़की देखने गया, वहाँ उसकी मुलाकात मीनाक्षी (सान्या मल्होत्रा) से होती है| मीनाक्षी बीबीए कर चुकी, खुले स्वभाव वाली आत्मविश्वास से भरी लड़की है| मीनाक्षी और सुंदरेश्वर दोनों बिल्कुल उलट मिजाज़ वाले दो लोग हैं| बावजूद इसके मीनाक्षी ने शादी के लिए हाँ कह दी क्योंकि उसे सुंदरेश्वर की खुद अपनी पहचान बनाने वाली बात बहुत अच्छी लगी थी|

शादी के तुरंत बाद ही सुंदरेश्वर को बंगलौर की एक कम्पनी से ट्रेनिंग के लिए बुलावा आता है| उसके सामने अपनी नई-नवेली पत्नी और नौकरी मिलने की नई-नवेली सम्भावना में से किसी एक को चुनने का संकट है| मीनाक्षी उसे उसकी प्राथमिकता के अनुसार काम करने की सलाह देती है| सुंदरेश्वर अपने नवविवाहित जीवन पर ट्रेनिंग के लिए बंगलौर जाने को वरीयता देता है|  

पारम्परिक शादियों में लड़का-लड़की को एक दूसरे को समझने में समय लगता है, लेकिन यहाँ तो मामला दूसरा था| मीनाक्षी और सुंदरेश्वर को जब तक समय मिलता, उससे पहले ही इनका लॉन्ग डिस्टेंस रिलेशनशिप शुरू गया| बावजूद इसके कि शहरों के बीच की दूरी थी, लेकिन दिलों की दूरी नहीं थी| दोनों फोन और विडियो कॉल से जितना संभव हो सके इस दूरी को पाटने की कोशिश कर रहे थे |


सुंदरेश्वर, मीनाक्षी के रिश्ते में बिखराव 

उधर सुंदरेश्वर को बंगलौर पहुँच कर पता चलता है कि उसकी कम्पनी शादीशुदा लोगों को नौकरी पर नहीं रखती है| इसलिए वह अपने ऑफिस में खुद के विवाहित होने की बात छुपा लेता है| यहाँ तक कि जब मीनाक्षी उसके जन्मदिन पर अचानक बंगलौर पहुँच जाती है तो सुंदरेश्वर अपने सहकर्मियों से उसे कज़िन बता कर मिलाता है|  

बंगलौर से लौटते समय आहत मीनाक्षी सुंदरेश्वर से कहती है कि, “यहाँ आकर ऐसा लगा जैसे तुम्हें जानती ही नहीं या जान नहीं पाई|” मीनाक्षी को ऐसा क्यों लगा? दरअसल मदुरै में मीनाक्षी सुंदरेश्वर की अनुपस्थिति से उपजे जिस भावनात्मक संकट से गुज़र रही थी, फ़ोन पर सुंदरेश्वर की बातों से उसे आभास होता था कि बंगलौर में वह भी उसी दौर से गुज़र रहा है| लेकिन मीनाक्षी ने देखा कि सुंदरेश्वर अपने दोस्तों और सहकर्मियों के बीच नए जीवन में मगन और खुश था| यह देखकर मीनाक्षी को लगता है कि वैवाहिक रिश्ते में वह अकेले संत्रास झेल रही है, सुंदरेश्वर तो बैंगलोर में खुशहाल ज़िन्दगी जी रहा है|


कहानी को निर्णायक मोड़ देने वाली घटना  

सुंदरेश्वर के परिवार के साथ तालमेल बनाने की मीनाक्षी की हर संभव कोशिश के बावजूद उसके पुरुष मित्र अनंथन (वरुण शशि राव) को लेकर घर में कलह मच जाती है| घर के बुज़ुर्ग मीनाक्षी को एक बहु, एक पत्नी की जिम्मेदारियों की याद दिलाते हुए आदेश देते हैं कि वह अनंथन की चाय कम्पनी में काम करने का प्रस्ताव ठुकरा दे| लेखक विवेक सोनी और अर्श वोरा इस प्रकरण के माध्यम से बेहद बारीकी से पितृसत्तात्मक परिवार की तहें खोलते हैं| पूरे विवाद में सुंदरेश्वर का झुकाव भी कहीं न कहीं घरवालों की तरफ ही था| लगभग अकेली पड़ चुकी मीनाक्षी यहाँ तक आते-आते इस शादी से त्रस्त हो चुकी थी| अतः वह सुंदरेश्वर का घर छोड़कर अनंथन के चाय बागन में काम करने चली जाती है| 


‘Meenakshi Sundareshwar’ Ending Explained

ट्रेनिंग के महत्वपूर्ण पड़ाव, प्रोजेक्ट प्रेसेंटेशन, से पहले सुंदरेश्वर के सहकर्मी सई कुमार (चेतन शर्मा) ने उसके विवाहित होने की बात कम्पनी के कर्ता-धर्ता सेंथिल सर (सुकेश अरोड़ा) को बता दी| इतना ही नहीं सई ने सुंदरेश्वर के फोन से मीनाक्षी को ऐन प्रेसेंटेशन के दिन बंगलौर आने के लिए मैसेज भी कर दिया| अपने रिश्ते को बचाने की एक अंतिम कोशिश के लिए मीनाक्षी जब वहां पहुँचती है तो सुंदरेश्वर का गुस्सा भड़क उठता है| दरअसल मीनाक्षी सब कुछ के बावजूद अपने वैवाहिक रिश्ते को बचाने की कोशिश कर रही थी जिसे सुंदरेश्वर समझ नहीं पाया और जब तक उसे अपनी गलती का अहसास हो पता तब तक मीनाक्षी एक बार फिर बहुत दूर जा चुकी थी| 

प्रेजेंटेशन में सुंदरेश्वर अपने एप ‘टूगेदर’ के बारे में बताते हुए सबके सामने खुद के शादीशुदा होने की बात स्वीकारता है और यह भी कहता है कि उसने अपनी पत्नी को ज्यादा बेहतर तरीके से समझने के लिए इस एप को बनाया है| वह कम्पनी की नौकरी छोड़कर मदुरै वापस आ जाता है और मीनाक्षी से मिलने की नाकाम कोशिश करता है| काफ़ी मशक्कत के बाद रजनीकांत की फिल्म के शो में अंततः वह अपनी पत्नी को खोज लेता है| 

सुंदरेश्वर मीनाक्षी से उनके रिश्ते में आई सारी मुश्किलों के लिए माफ़ी मांगता है| इन अनुभवों से गुजरने के बाद सुंदरेश्वर को समझ में आ जाता है कि मीनाक्षी उसके जीवन के लिए सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है, वह रहेगी तब ही बाकी सब चीज़ें भी ठीक रहेगी| इस जगह पर फ़िल्म ‘Meenakshi Sundareshwar’ कैरियर, भौतिक महत्वकांक्षाओं पर प्रेम, भावनाओं, परिवार, रिश्तों को एहमियत देने की पैरोकार बन कर सामने आती है| वैचारिक तौर पर तो फ़िल्म सही निष्कर्ष पर पहुँचती है लेकिन मीनाक्षी और सुंदरेश्वर के जीवन में आई मुश्किल जिस सरलता से सुलझ जाती है वह फ़िल्म को यथार्थ से दूर ले जाती है| 


Meenakshi Sundareshwar फ़िल्म ओटीटी प्लेटफार्म Netflix पर देख सकते हैं |

Suman Lata
Suman Lata
Suman Lata completed her L.L.B. from Allahabad University. She developed an interest in art and literature and got involved in various artistic activities. Suman believes in the idea that art is meant for society. She is actively writing articles and literary pieces for different platforms. She has been working as a freelance translator for the last 6 years. She was previously associated with theatre arts.

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