Thursday, October 6, 2022

‘Home Shanti’ Season 1: Summary And Review In Hindi: ऋषिकेश मुखर्जी की फिल्मों की याद दिलाती है 

हिन्दी सिनेमा के पुरोधा निर्देशक ऋषिकेश मुखर्जी, महानगरीय जीवन की सरल-सहज कहानियों पर हल्की-फुल्की मनोरंजक फ़िल्में बनाने के लिए जाने जाते थे| 70-80 के दशक में उन्होंने साफ़-सुथरी, लाइट मूड कॉमेडी फिल्मों का एक अलग ही व्याकरण रच डाला| आज भी उन फिल्मों को देखना सुकून भरा अनुभव है| लगभग उसी तासीर की एक वेब सीरीज़ डिज़्नी प्लस हॉटस्टार पर स्ट्रीम हुई है, नाम है “Home Shanti”| पोषम पा प्रोडक्शन की इस सीरीज़ का निर्देशन आकांक्षा दुआ ने किया है| 

अपना एक घर हो, यह हर मध्यमवर्गीय परिवार की ज़िन्दगी का सबसे बड़ा सपना होता है| 6 एपिसोड वाली वेब सीरीज़ में जोशी परिवार भी इस सपने को हकीकत में बदलने की कोशिश में लगा हुआ है| इस जद्दोजहद में जोशी परिवार के ताने-बाने खुलते और बंधते रहते हैं| कहानी आगे बढ़ने के साथ उनके संबंधो की मज़बूत बुनावट सामने आती है| मकान के साथ ही रिश्तों की नींव की गहराई का भी अंदाज़ा लगता है, जो ईंट-गारे के किसी ढांचे को घर बनाने के लिए ज़रूरी है|  


Plot summary of ‘Home Shanti’ Season 1

जोशी परिवार

जोशी परिवार देहरादून में रहता है| कॉलेज की वाईस प्रिंसिपल सरला जोशी (सुप्रिया पाठक) अंग्रेजी की टीचर हैं| परिवार उनको एलॉट हुए सरकारी आवास में रहता है| सरला जोशी सरल हृदया, लेकिन सख्त मिजाज़ महिला हैं| स्कूल की तरह ही घर को भी अनुशासन के आधार पर चलाती हैं| पति उमेश जोशी ‘सुजन’ (मनोज पहवा) कवि हैं| बेफ़िक्री उनका मिजाज़, बातें भूलना आदत और क्रिकेट मैच की कमेंट्री सुनना शौक है| वह मंच पर कविता पढ़ने, कार चलाने, लोन लेने यहाँ तक कि अपने पसंदीदा कवि से मिलने तक से डरते हैं| जोशी दम्पति के दो बच्चे, बेटी जिज्ञासा (चकोरी द्विवेदी) और बेटा नमन (पूजन छाबरा) हैं| पढ़ाकू बहन के उलट नमन दिन रात टाइगर श्रॉफ की तरह बॉडी बनाने के ख्यालों में खोया रहता है| 

अपना घर बनाने की कवायद 

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सरला रिटायरमेंट से पहले अपना एक आशियाना बना लेना चाहती हैं| उनके पास एक प्लाट था, जिस पर सपनों का महल खड़ा करना था| एपिसोड दर एपिसोड घर बनने की प्रक्रिया को समेटते हुए सीरीज़ आगे बढ़ती है| हर एपिसोड में निर्माण से जुड़ी कोई समस्या खड़ी होती है, जिसका समाधान एपिसोड के अंत में परिवार के प्यार और प्रयास से निकलता है|

भूमि पूजन 

शुरुआत भूमि पूजन से होती है| भूमि पूजन को लेकर सरला बेहद उत्साहित थी जबकि घर के बाकी तीन सदस्य गंभीर नहीं थे| बेटा नमन माँ के मना करने के बाद भी उस दिन चिकन मोमो खा लेता है, बेटी जिज्ञासा कैम्प जाने की जुगत भिड़ाने में लगी हुई थी और उमेश का सारा ध्यान क्रिकेट मैच में था| नींव के लिए खोदे गए गड्ढे में से जब सांप निकलता है तो पंडित जी इसे अपशकुन मानते हुए भूमि पूजन स्थगित कर देते हैं| एक तो घर वालों की उपेक्षा और दूसरे भूमि पूजन रुकने से सरला का मन आहत हो जाता है| सरला को दुखी देखकर उमेश और बच्चों का अपराधबोध जागता है| अंत में वे सब मिलकर बारिश के बावजूद उसी दिन भूमि पूजन संभव करते हैं| 

घर का नक्शा

फिर बारी आती है घर के नक़्शे की| भावी घर को लेकर परिवार के सदस्यों की अपनी-अपनी इच्छाएं थी| जिज्ञासा को नए घर में अलग बाथरूम, जोशी दम्पति को स्टडी रूम और नमन को जिम चाहिए था| मुश्किल यह थी, मुट्ठीभर ज़मीन में ऐसा घर बनना मुश्किल था जो सबके सपनों को समेट सके| अंततः नक़्शे की गुत्थी तब सुलझती है जब माँ-बाप बच्चों की ख़ुशी के लिए और बच्चे माँ-बाप की ख़ुशी के लिए अपनी-अपनी इच्छाओं की तिलांजलि देने का मन बना लेते हैं| तीसरे एपिसोड में सरला की माँ की एंट्री होती है| बच्चों की नानी का प्रिय संवाद है, “घर बनाने के लिए चील की नज़र रखनी पड़ती है|” माँ की सीख से प्रेरित सरला की चील नज़र की गाज़ ठेकेदार पप्पू पर गिरती है| काफ़ी उठापटक के बाद पप्पू की ईमानदारी सामने आती है और सारा मामला सुलझता है| 

लंटर पड़ना 

लंटर पड़ना, घर बनने का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव होता है| इस पड़ाव पर सरकारी देवता को दक्षिणा चढ़ाए बिना एक कदम भी आगे नहीं बढ़ा जा सकता| सरला जोशी के निर्माणाधीन घर पर देहरादून नगर नियोजन का अधिकारी धावा बोल देता है| वह ‘सुविधा शुल्क’ की मांग करता है| आदर्शवादी सरला जोशी को रिश्वत देना गवांरा नहीं था, वह सीधे एस.डी.एम. कार्यालय पहुँच जाती हैं| संयोग से एस.डी.एम. साहिबा उनकी पुरानी स्टूडेंट निकलीं| एस.डी.एम. अपने अधिकारी को रिश्वत के लिए दण्डित भी करती है और सरला जी को निर्माण कार्य की अनुमति भी दे देती है| 

इंटीरियर डिजाइनिंग 

बात घर की साज-सजावट पर आती है तो सरला और उमेश को एहसास होता है कि अच्छे इंटीरियर डिज़ाइनर की सेवाएँ ले पाना उनके बजट के बाहर था| घर की सजावट में आने वाले खर्चे की मुश्किल तब दूर होती है, जब मंच पर कविता पढ़ने से डरने वाले उमेश जोशी अपने नायक कुमुद मुरादाबादी की प्रेरणा से मंच पर उतर कर समां बाँध देते हैं और अपने लाजवाब प्रदर्शन के लिए एक बड़ी धनराशि हासिल करते हैं|

घर का नामकरण

सीरीज़ के आख़िरी एपिसोड में उमेश शादी की सालगिरह यादगार बनाने के लिए एक सरप्राइज़ पार्टी रखता है| उस दिन घर के नेमप्लेट को लेकर पति-पत्नी में खूब बहस हो गई| नए घर का नाम सरला ‘जोशी ऑर्चर्ड’ रखना चाहती थी और उमेश ‘सुजन निवास’| छोटी सी बात से शुरू हुई लड़ाई शादी के 23 साल के हिसाब-किताब तक पहुँच जाती है और सरप्राइज पार्टी पर संकट के बदल मंडराने लगते हैं| यह बादल छटते हैं या नहीं? इसका उत्तर सीरीज़ के क्लाइमेक्स सीन में मिलता है|  


‘Home Shanti’ Season 1: क्यों देखें? 

साफ़-सुथरे मनोरंजन के लिए

ओटीटी प्लेटफ़ॉर्म पर चारों तरफ क्राइम थ्रिलर, डॉन या फिर अंडरवर्ल्ड की कहानियां छाई हुई हैं| इन सबसे बची हुई जगहों पर विवाहोत्तर, लेस्बियन और गे संबंधों का बोलबाला है| जीवन की सरल, सहज कहानियों पर कम ही काम दीखता है| ऐसे में ‘Home Shanti’ आपको परिवार के साथ बैठ कर देखने और आनंद लेने मौका देती है|  

ऋषिकेश मुखर्जी की फिल्मों जैसे ‘फील गुड इफ़ेक्ट’ के लिए

हर किसी के मन में ऐसे जीवन और परिवार की कामना होती है, जहाँ सब एक दूसरे का ख्याल रखते हुए राज़ी-ख़ुशी रहें| मुश्किलें आयें भी मिलजुलकर की गई कोशिशों से सुलझ जाएँ| यूँ तो जोशी परिवार के चारों सदस्य हमेशा टॉम एंड जेरी बने रहते हैं, लेकिन जब भी कोई दुःख, तकलीफ या मुसीबत आती तो वह एक दूसरे का सबसे बड़ा सहारा बन जाते| 

अच्छी कॉमेडी, मजेदार संवादों और गुनगुनाती कविताओं के लिए

“Home Shanti” को लिखने में एक पूरी टीम लगी हुई थी| अक्षय अस्थाना, निधि बिष्ट, आकांक्षा दुआ, सौरभ खन्ना, मयंक पाण्डेय और निखिल सचान की टीम ने बखूबी एक ऐसे विषय को वेब सीरीज़ में बदला जिससे हर मध्यमवर्गीय अपने को जुड़ा हुआ पायेगा| लेखकों ने बिना अश्लील हुए, बिना द्विअर्थी और फूहड़ हुए हास्य पैदा किया| इसके लिए तारीफ़ तो बनती है| संवाद और सीरीज़ में जगह-जगह इस्तेमाल की गई कविताएँ मन को ठंडक देती हैं| “चाहे बना रहे हों घर या निभा रहे हों रिश्ते, दोनों में गहरी नींव का होना ज़रूरी है..”, “छलांग मार कर ही निकलेगा डूबने का डर, जो पानी में उतरेगा नहीं उसे तैरना नहीं आएगा”, “घर सिर्फ दीवारों-छतों का जमघट नहीं, घर उसमें रहने वालों का ठिकाना भी है” जैसी लाइन्स किसे अच्छी नहीं लगेंगी| “मशीन अक्षय कुमार से ज्यादा बिजी है..”, और “आज की पूजा में गड्ढा यही खोदेगा” जैसे संवाद सीन को मजेदार बनाते हैं|  

मनोज पहवा और सुप्रिया पाठक की मंझी हुई अदाकारी के लिए

मनोज पाहवा और सुप्रिया पाठक अपने सहज अभिनय के लिए जाने जाते हैं| ‘Home Shanti’ में भी वह दोनों बेहद कुशलता और सहजता से जोशी दंपत्ति की भूमिका निभा जाते हैं| उन्हें देखना अच्छा लगता है| 


पोषम पा प्रोडक्शन की वेब सीरीज़ “Home Shanti” का Season 1 डिज़्नी प्लस हॉटस्टार पर उपलब्ध है|  

Suman Lata
Suman Lata
Suman Lata completed her L.L.B. from Allahabad University. She developed an interest in art and literature and got involved in various artistic activities. Suman believes in the idea that art is meant for society. She is actively writing articles and literary pieces for different platforms. She has been working as a freelance translator for the last 6 years. She was previously associated with theatre arts.

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