Wednesday, October 5, 2022

‘Return To Space’ Summary And Review In Hindi: स्पेस एक्स की अन्तरिक्ष में एक बड़ी छलांग  

नील आर्मस्ट्रांग चाँद पर कदम रखने वाले पहले इन्सान थे| आर्मस्ट्रांग से ठीक 20 मिनट बाद जिस दूसरे व्यक्ति ने चाँद की धरती को छुआ, वह थे बज़ एल्ड्रिन| एल्ड्रिन अपोलो 11 अभियान के तीन सदस्यीय दल का हिस्सा थे| उन्होंने ‘Return to earth’ शीर्षक से अपनी आत्मकथा लिखी| पचास सालों बाद कारोबारी कम्पनी स्पेस एक्स की तरफ से अन्तरिक्ष अभियानों की दिशा में एक दिलचस्प पहलकदमी हुई है| फ़िल्मकार एलिजाबेथ चाई वासारेली  (Elizabeth Chai Vasarhelyi) और जिमी चिन (Jimmy chin) ने स्पेस एक्स की इन्हीं पहलकदमियों को अपनी नई साइंस डॉक्यूमेंट्री फ़िल्म का विषय बनाया है| नेटफ्लिक्स के लिए बनाई गई इस डॉक्यूमेंट्री का नाम “Return To Space” है, जो “Return To Earth” की याद दिलाता है| 

दुनिया के जाने-माने उद्योगपति एलन मस्क मंगल ग्रह पर इंसानों को बसाने का सपना देखते हैं और अन्तरिक्ष अनुसंधानों की दिशा में काम करने वाली उनकी कम्पनी स्पेस एक्स इस सपने को साकार करने का एक जरिया है| डॉक्यूमेंट्री “Return To Space” एलन मस्क और स्पेस एक्स के जादुई सफ़र को दर्ज़ करती है| साथ ही अन्तरिक्ष अभियानों में निजी क्षेत्र की बढ़ती ताकत और भूमिका को रेखांकित करती है| 


पृष्ठभूमि 

शीत युद्ध काल में अमेरिका का अन्तरिक्ष अभियान

शीत युद्ध काल में अमेरिका और सोवियत संघ के बीच वर्चस्व की लड़ाई छिड़ी हुई थी| अन्तरिक्ष की खोजें भी इस जंग का मैदान बना दी गईं| पहली बाज़ी सोवियत संघ ने जीती| उसने 1957 में मानव निर्मित पहले सेटेलाइट ‘स्पुतनिक’ को अन्तरिक्ष में स्थापित कर इतिहास रच दिया था| इतना ही नहीं 12 अप्रैल 1961 को यूरी गैगरीन को अन्तरिक्ष में पहली बार भेजने पर दुनिया भर में सोवियत संघ की धाक जम गई थी| अमेरिका के ऊपर अन्तरिक्ष अनुसंधानों में अपनी श्रेष्ठता स्थापित करने का जबरदस्त दबाव था| परिणामस्वरूप अपोलो 11 अभियान शुरू किया गया| अमेरिका ने सन 69 की जुलाई में अन्तरिक्ष विज्ञान में ऊँची छलांग लगते हुए इंसानों को चाँद पर उतार दिया| इसके साथ ही अन्तरिक्ष विज्ञान की इस रेस में अमेरिका अंतिम रूप से विजेता माना जाने लगा| 


Summary Of ‘Return To Space’

अमेरिकी सरकार का अन्तरिक्ष अभियानों को बंद करने का फैसला 

- Advertisement -

अमेरिका लम्बे समय तक अपने अन्तरिक्ष अभियानों में तेज़ी लाता रहा| यह अभियान निश्चित रूप से बहुत खर्चीले होते थे| सोवियत संघ के विघटन के बाद अमेरिका के लिए यूँ भी कोई चुनौती बची नहीं रह गई थी| इस वजह से 30 साल चले लम्बे स्पेस शटल अभियान को 2011 में बंद करने का निर्णय लिया गया| ‘Return to space’ डॉक्यूमेंट्री की शुरुआत स्पेस शटल के आखिरी अभियान और उसके बंद होने के भावुक दृश्यों के साथ होती है| 

खगोलीय अनुसंधानों को निजी क्षेत्रों के हवाले करने का निर्णय 

सरकार द्वारा स्पेस शटल अभियानों से हाथ खींचने के बाद तत्कालीन बराक ओबामा सरकार ने स्पेस मिशन में प्राइवेट सेक्टर की मदद लेने की नीति अपनाई| जिसके फलस्वरूप आज अमेरिका में ‘वर्जिन गेलेक्टिक’ (वर्जिन समूह के मालिक रिचर्ड ब्रैनसन की कम्पनी), ‘ब्लू ओरिजिन’ (अमेज़न के मुखिया जेफ़ बेजोस की स्पेस कम्पनी) और ‘स्पेस एक्स’ (टेस्ला के मालिक एलन मस्क की स्पेस कम्पनी) जैसी निजी क्षेत्र की कम्पनियाँ अन्तरिक्ष अनुसंधानों की बड़ी खिलाड़ी बनकर उभरी हैं| जहाँ एक तरफ ब्यूरोक्रेटिक तौर-तरीकों से झल्लाए लोगों ने इन निजी व्यवसायिक कम्पनियों का खुल कर स्वागत किया| वहीँ दूसरी तरफ नील आर्मस्ट्रांग समेत कई सजग लोगों ने मुखर विरोध भी दर्ज कराया था| 

एलन मस्क की स्पेस एक्स

अभी तक हासिल वैज्ञानिक तथ्यों के अनुसार ब्रह्माण्ड में जीवन केवल पृथ्वी पर है| यह कभी भी किसी उल्कापिंड, किसी प्राकृतिक आपदा या परमाणु युद्ध जैसी मानवीय गलतियों के कारण खत्म हो सकता है| इससे पहले कि इस तरह की कोई दुर्घटना हो हमें पृथ्वी से बाहर इंसानों के जीने, रहने लायक स्थितियां बना लेनी होगी| एलन मस्क और उनकी कम्पनी स्पेस एक्स इसी उद्देश्य से प्रेरित हो चंद्रमा में बेस बनाते हुए मंगल पर इंसानों को बसाने का लक्ष्य लेकर काम कर रही है| 

स्पेस एक्स की शुरूआती असफलताएँ  

अपने मिशन की शुरुआत में स्पेस एक्स ने सबसे पहले फाल्कन नाम के रॉकेट को विकसित किया| दो चरणों वाले फाल्कन 1 रॉकेट की सफलता पर एलन मास्क की ज़िन्दगी और उम्मीद टिकी थी| उनके पास केवल तीन बार रॉकेट परीक्षण का पैसा था| पहले परीक्षण में उड़ान भरने के 30 सेकंड बाद रॉकेट का इंजन अपने आप बंद हो गया| एक साल बाद किया गया दूसरा प्रयास भी नाकामयाब रहा| अगले साल फिर तीसरी कोशिश भी असफल रही| स्पेस एक्स की पूरी टीम और एलन मस्क के लिए यह समय गहरे अवसाद वाला साबित हुआ| लेकिन मस्क ने एक बार फिर हिम्मत बटोरी और अपना बचा-खुचा सारा पैसा अगले परीक्षण पर लगा दिया| इधर नासा भी स्पेस एक्स की गतिविधियों पर नज़र रखे हुए था| अंततः फाल्कन 1 पृथ्वी की कक्षा में सफलता पूर्वक पहुँचने वाला निजी क्षेत्र का पहला रॉकेट बन गया| इस सफलता के साथ ही स्पेस एक्स को नासा की तरफ से अंतर्राष्ट्रीय स्पेस स्टेशन में सामान पहुँचाने का डेढ़ अरब डॉलर का अनुबंध भी मिल गया|  

फिर से इस्तेमाल हो सकने वाले रॉकेट (Reusable rocket) 

मस्क का कहना है कि जीवन को बचाने के लिए हमें कई ग्रहों पर रहने वाली प्रजाति बनना होगा| ऐसा संभव करने के लिए अन्तरिक्ष उड़ानों की लागत कम करना ज़रूरी है| लागत तभी कम होती जब रॉकेट विज्ञान में किसी ऐसी तकनीक का विकास होता जिससे एक ही रॉकेट को कई बार इस्तेमाल किया जा सके| स्पेस एक्स के इंजीनियरों ने यह संभव कर दिखाया| वह फाल्कन 9 के बूस्टर को धरती पर वापस लाकर एक निश्चित स्थान पर खड़ा करने में सफल हो गए| ऐसा उन्होंने बार-बार करके दिखाया| यह तकनीक स्पेस एक्स के मिशन को गति देने में सहायक हुई| 

मिशन डेमो 2

फाल्कन की सफलता के बाद स्पेस एक्स मिशन डेमोंस्ट्रेशन/डेमो 2 को सफल बनाने में जुट गया| इस मिशन में व्यावसायिक ढंग से बने हुए एक अन्तरिक्षयान को इंटरनेशनल स्पेस सेंटर तक की यात्रा करनी थी| खास बात यह थी कि इस बार नासा के दो अन्तरिक्ष यात्रियों, एस्ट्रोनॉट डग हर्ले (Doug Hurley) और बॉब बेंकन (Bob Behnken) को इंटरनेशनल स्पेस सेंटर तक पहुँचाना और वहां से वापस लाना था| 

ड्रैगन का लॉन्च और सकुशल वापसी 

मिशन डेमो 2 के तहत स्पेस क्राफ्ट ड्रैगन को लॉन्च किया जाना था| लेकिन मौसम ख़राब होने की वजह से लॉन्च एक बार रोक दिया गया| तीन दिनों बाद फिर जब ड्रैगन ने उड़ान भरी तो वह सफलता पूर्वक अन्तरिक्ष यात्रियों समेत पृथ्वी की कक्षा में पहुँच गया| इसके बाद स्पेस स्टेशन से जुड़ने यानि डॉक होने के काम में भी कोई दिक्कत नहीं आई| 

62 दिनों बाद अनडॉकिंग हुई| बॉब और डग को सकुशल धरती पर लाना भी अपने आप में एक चुनौती थी| पहले माना जाता था कि ऊपर अन्तरिक्ष में अच्छे से पहुँच गए तो अभियान सफल हुआ लेकिन कोलम्बिया हादसे के बाद से इस सोच में बड़ा बदलाव आया है| 2003 में वायुमंडल में वापसी के दौरान कोलम्बिया यान के साथ जबरदस्त हादसा हुआ था| यह वही अभियान था जिसमें कल्पना चावला समेत अनेक अन्तरिक्षयात्रियों की दर्दनाक मौत हो गई थी| ड्रैगन की धरती पर सकुशल वापसी के साथ ही स्पेस एक्स ने इंटरनेशनल स्पेस सेंटर तक इंसानों को भेजने और वापस लाने की क्षमता हासिल कर ली| एलन मस्क के अनुसार यह क्षमता मंगल अभियान की दिशा में बढ़ा हुआ एक कदम है| 


‘Return To Space’ Review In Hindi: निजी क्षेत्र की सक्रियता से उपजी आशंकाओं या खतरों की अनदेखी 

डॉक्यूमेंट्री “Return To Space” अन्तरिक्ष विज्ञान में रूचि रखने वालों को ज़रूर पसंद आएगी| जीवन को सहेजने की कोशिशों में विज्ञान और तकनीक की यात्रा कहाँ तक पहुंची है, इसका एक अंदाज़ा लगता है| साथ ही संकेत मिलते हैं कि निकट भविष्य में स्पेस टूरिज्म तेज़ी से बढ़ेगा क्योंकि अन्तरिक्ष अनुसंधान और अभियानों में निजी क्षेत्र की कम्पनियां उतर आई हैं| 

“Return To Space” कई बार स्पेस एक्स का विज्ञापन जैसी लगने लगती है| अन्तरिक्ष अनुसंधानों में सक्रिय दूसरी कम्पनियों का ज़िक्र न के बराबर है, जिसकी वजह से अन्तरिक्ष अभियानों से अमेरिकी सरकार के पीछे हटने के बाद स्पेस एक्स इकलौता तारणहार लगने लगता है| डॉक्यूमेंट्री के शुरूआती हिस्से में एलन मस्क के व्यक्तित्व का आभामंडल छाया हुआ है, जिसे कम किया जा सकता था| उनसे जुड़े विवादों को बहुत हल्के में निकाल दिया गया है| “Return To Space” अन्तरिक्ष अभियानों में कारोबारी कंपनियों की सक्रियता और उससे होने वाले फायदों को तो सामने लाती है लेकिन खतरों, आशंकाओं पर समुचित ध्यान नहीं देती है|  


स्पेस साइंस में रूचि रखने वाले दर्शक डॉक्यूमेंट्री “Return To Space” को नेटफ्लिक्स पर हिन्दी ऑडियो के साथ देख सकते हैं| 

Suman Lata
Suman Lata
Suman Lata completed her L.L.B. from Allahabad University. She developed an interest in art and literature and got involved in various artistic activities. Suman believes in the idea that art is meant for society. She is actively writing articles and literary pieces for different platforms. She has been working as a freelance translator for the last 6 years. She was previously associated with theatre arts.

नए लेख