Sunday, September 19, 2021

‘Kota Factory’ Season 1: Ending, Explained in Hindi

अकेले मुंबई ही सपनों का शहर नहीं है | देश भर के कई दूसरे शहर भी अलग-अलग तरह के सपनों को पूरा करने का दावा करते हैं | कोटा (राजस्थान) शहर भी एक ऐसा जादूगर है, जो डॉक्टर, इंजीनियर बनने के सपने को पूरा करने की बात करता है | देश भर से हर साल आने वाले लाखों लड़के-लड़कियों की बदौलत कभी मात्र एक शहर रहा कोटा, अब कोटा फैक्टरी (Kota Factory) बन चुका है | 

TVF (The Viral Fever) वालों ने साल 2019 में इसी कोटा शहर और आई.आई.टी. का सपना लेकर यहाँ आने वाले स्टूडेंट्स की कहानी पर ‘कोटा फैक्टरी’ (Kota Factory) नाम से एक वेब सीरीज़ बनाई थी | निर्देशक राघव सुब्बू की कुल 5 एपिसोड वाली यह वेब सीरीज़ यू ट्यूब पर रिलीज़ हुई थी | आइए, इस लेख में ‘कोटा फैक्टरी’ (Kota Factory) सीज़न 1 की कहानी और उसके अंत पर विस्तार से चर्चा करते हैं | 


‘Kota Factory’ Season 1 Story in Hindi –

कोटा की दुनिया में वैभव का पदार्पण 

वैभव पाण्डेय (मयूर मोरे) नाम का एक 16 वर्षीया छात्र 10वीं पास करके, इटारसी से कोटा आता है | आधे अकादमिक सत्र के बीत जाने के बाद आने की वजह से कोटा की सबसे नामी कोचिंग संस्था ‘माहेश्वरी क्लासेज़’ में उसका एडमिशन नहीं हो पाता है | इसलिए उसे ‘प्रोडिजी क्लासेज़’ में एडमिशन लेना पड़ता है | प्रोडिजी में भी उसे सबसे आखिरी बैच ए-10 में जगह मिलती है | 

जिस पीजी में वह रहने जाता है, वहाँ उसे आई.आई.टी. की तैयारी करने वाला मीना नाम का एक लड़का मिलता है | मीना भी प्रोडिजी क्लासेज़ में पढ़ता है लेकिन उसका बैच ए-5 है | मीना वैभव को समझाता है कि ए—10 में रह कर वह कुछ नहीं कर पायेगा इसलिए उसे प्रोडिजी क्लासेज़ के मैनेजर दीपक से मिल कर अपना बैच बदलवा लेना चाहिए | जब वैभव मैनेजर से बात करता है तो वह ऐसा करने से साफ मना कर देते हैं |

सबके चहेते टीचर, जीतू भैया  

वैभव किसी भी हालत में अपना बैच बदलवाना चाहता है | प्रोडिजी क्लासेज़ में सबके चहेते जीतू भैया (जितेन्द्र कुमार) ऐसे समय में उसके संकटमोचक बन कर आते हैं | आई.आई. टी. से पढ़े जीतू भैया कभी खुद कोटा में रह कर तैयारी कर चुके हैं और अब प्रोडिजी क्लासेज़ में फिजिक्स के लेक्चरर हैं | वह वैभव को फिजिक्स का एक प्रश्नपत्र देते हैं, जिसमें 50 प्रश्न थे | वैभव को उन प्रश्नों को 24 घंटे में हल करके लाने के लिए कहते हैं | वैभव, अपने दोस्त मीना और उदय की मदद से किताबों में देख-देख कर 42 प्रश्नों का उत्तर लिख देता है | जीतू भैया देखते ही समझ गए कि वैभव किताब से नक़ल मारकर आया है | चोरी पकड़ने के बावजूद जीतू भैया, वैभव की लगन देखकर उसे ए-5 बैच में प्रवेश दे देते हैं | 

नया शहर, नया परिवेश  

वैभव को नए शहर, नए परिवेश में खुद को ढालने में बहुत दिक्कत होती है | उससे मेस का खाना और कोटा का खारा पानी बिलकुल भी पिया नहीं जा रहा था | पढ़ाई में भी मन नही लग पा रहा था | एक बार फिर जीतू भैया उसके तारणहार बनते हैं | वह उसे बताते हैं कि 21 दिन में कोई भी आदत बदली या डाली जा सकती है | बस ज़रूरत है 21 दिन तक उसे लगातार करने की | जैसे, वैभव अगर 21 दिन वही खारा पानी पियेगा तो 22वें दिन उसे पानी अच्छा लगने लगेगा | वैभव के लिए यह तरीका काम कर गया |

इनओर्गानिक केमिस्ट्री की मिस्ट्री 

अब वैभव का अपनी पढ़ाई में मन लगने लगा | बस एक इनओर्गानिक केमिस्ट्री ही उसके पल्ले नहीं पड़ रही थी | वैभव और मीना को लगता है कि इनओर्गानिक केमिस्ट्री में उनकी बुरी स्थिति ख़राब टीचर की वजह से है | वैभव और उसके दोस्त, टीचर बदलने के लिए प्रबंधन पर दबाव डालते हैं | नए टीचर आते हैं, लेकिन बात नहीं बनती | तीसरे टीचर के आने के बाद भी समस्या जस की तस बनी रहती है | तब जाकर वैभव को समझ आता है कि समस्या टीचर में नही बल्कि खुद उसमें है | 

इनओर्गानिक केमिस्ट्री विषय को लेकर वह बहुत नकारात्मक हो जाता है | एक बार फिर जीतू भैया ही वैभव के काम आते हैं | वह उसकी समस्या को समझते हैं और कहते हैं कि जो विषय समझ में न आ रहा हो, उस पर समय बर्बाद करने से बेहतर है बाकि विषयों पर महारत हासिल किया जाए | इनओर्गानिक केमिस्ट्री के 11% नंबर के चक्कर में दूसरे विषयों के 89% नंबर दांव पर लगाना समझदारी नहीं है |


 कहानी को मोड़ देने वाली घटना

प्रोडिजी और माहेश्वरी क्लासेज के बीच फंसा हुआ वैभव 

कोचिंग से चार दिन की छुट्टी मिली तो उदय अपनी गर्लफ्रेंड शिवांगी के साथ कोटा घूमने की योजना बनाता है और वैभव को भी साथ चलने के लिए बोलता है | शिवांगी के साथ उसकी दोस्त वर्तिका रतावल (रेवती पिल्लई) भी आने वाली थी | लेकिन वर्तिका को माहेश्वरी क्लासेज़ के एडमिशन टेस्ट की तैयारी करनी थी, इसलिए वह घूमने के लिए मना कर देती है | वैभव भी वर्तिका की तैयारी कराने के लिए घूमने जाने का विचार छोड़ देता है | वह दोनों, चार दिन तक लगातार साथ में पढ़ाई करते हैं | वर्तिका का साथ देने के लिए वैभव भी माहेश्वरी क्लासेज़ का फॉर्म भर देता है |  

जब रिज़ल्ट निकलता है तो पता चलता है कि वैभव पास हो गया और वर्तिका का नहीं हो पाया |  


‘Kota Factory’ Season 1: Ending in Hindi

वैभव का चुनाव 

वैभव के साथ ही प्रोडिजी के कई और लड़कों ने भी माहेश्वरी का एंट्रेंस एग्जाम पास किया था | उन सबको प्रोडिजी के मैनेजर दीपक ने अपने ऑफिस में बुलाया | दीपक और बाटला सर ने मिलकर उन बच्चों को प्रोडिजी क्लासेज़ न छोड़ने के लिए समझाया और साथ ही कई तरह के प्रलोभन भी दिए | जैसे, उन सबको बैच ए -1 में शिफ्ट करना, उनकी फ़ीस की किश्त माफ़ करना और स्कॉलरशिप देना आदि | वैभव दुविधा में फंस गया | वह जिस वर्तिका के लिए माहेश्वरी में जाना चाहता था, उसका तो एडमिशन ही नहीं हुआ | प्रोडिजी में उसके दोस्त थे, यहाँ उसकी गिनती टॉपर में होती थी | जबकि माहेश्वरी में ज्यादा सुनहरे भविष्य की सम्भावना ज़रूर थी लेकिन वहाँ उसे सब कुछ नए सिरे से शुरू करना पड़ेगा | नए परिवेश में ढलना पड़ेगा |

एक बार फिर जीतू भैया ने उसके मन की दुविधा दूर की | खुद प्रोडिजी में पढ़ाने के बाद भी उन्होंने कहा कि यहाँ के टॉपर बनने से कहीं अच्छा है, माहेश्वरी में ए -3 में पढ़ना | 

अंतत वैभव अपने दोस्तों, अपने जाने-पहचाने परिवेश और वर्तिका के मोह को पीछे छोड़ते हुए माहेश्वरी जाने का फैसला करता है |


Ending Explained in Hindi

ज़िन्दगी कहीं रूकती नहीं है  

अंतिम दृश्य में हम वैभव को उदय के साथ प्रोडिजी से माहेश्वरी क्लासेज़ जाते हुए देखते हैं | यह पूरा दृश्य ठीक उसी तरह से फ़िल्माया गया है, जैसे पहले एपिसोड में वैभव को ऑटो रिक्शा पर बैठकर माहेश्वरी से प्रोडिजी क्लासेज़ जाते हुए दिखाया गया था | अंतिम दृश्य वैभव के जीवन का एक चक्र पूरा होते हुए दिखाता है | फर्क बस इतना है कि पहले एपिसोड में कोटा आया वैभव नई दुनिया से एकदम अनजान था, लेकिन अंतिम दृश्य में उसके पास कोटा के जीवन का अपना अनुभव और अपनी सफलताएँ हैं | जिनकी वजह से वह अब ज्यादा परिपक्व नज़र आता है | पहले दृश्य में वैभव ने आई. आई. टी. के अपने सपने को पूरा करने की यात्रा बस शुरु ही की थी, जबकि अंतिम दृश्य में वह अपनी मंज़िल की तरफ एक कदम आगे बढ़ा हुआ और विश्वास से भरा नज़र आता है | 

अंतिम दृश्य में मीना की तरह ही एक नया लड़का सुश्रुत आता है | जिसका आना ही यह आभास देता है कि वैभव के जीवन का एक नया अध्याय शुरू होने वाला है | माहेश्वरी क्लासेज पहुँचने पर पुराने दोस्तों और टीचर के बिछड़ने की उदासी ज़रूर है, लेकिन इतना तय है कि फिर कुछ नई कहानियाँ बनेंगी, कुछ नए दोस्त बनेंगे, ज़िन्दगी कुछ नए पाठ सिखाएंगी और कुछ नई सफलताएं-असफलताएं मिलेंगी | ज़िन्दगी का सफ़र यूँ ही चलता रहेगा |

कोटा के जीवन का स्याह और सफ़ेद पहलू 

‘कोटा फैक्टरी’ (Kota Factory) वेब सीरीज़ को पूरा काले और सफ़ेद रंग में रखा गया है | यह एक तरह का नया प्रयोग है | इसके माध्यम से निर्देशक ने आई. आई. टी. की तैयारी करने वाले छात्रों और कोटा फैक्टरी के स्याह-सफ़ेद पहलू को दिखाने की कोशिश की है | इन छात्रों के जीवन में एक तरफ तो सपनों, उम्मीदों, रोशन भविष्य की कामना होती है | वहीँ दूसरी तरफ प्रतियोगी परीक्षाओं की गलाकाट प्रतियोगिता, प्रबंधकों के लिए कुबेर के खजाने बन चुके कोचिंग इंस्टिट्यूट और आई.आई.टी./नीट जैसी परीक्षाओं के आधार पर बने बाज़ार का ज़बरदस्त दबाव भी रहता है | 


“कोटा फैक्टरी” (Kota Factory) सीज़न-2, 23 सितम्बर 2021 को नेटफ्लिक्स पर आने वाला है |

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Suman Lata
Suman Lata
Suman Lata completed her L.L.B. from Allahabad University. She developed an interest in art and literature and got involved in various artistic activities. Suman believes in the idea that art is meant for society. She is actively writing articles and literary pieces for different platforms. She has been working as a freelance translator for the last 6 years. She was previously associated with theatre arts.

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